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Showing posts from September, 2024

POETRY • ( LOVE /HOME/LIFE) प्यार घर और जीवन

न तो जज़्बात के पैरों से कभी ज़िंदगी चलती है न ही विकल्परहित जीवन में कोई खुशी मिलती है न तो इश्क के दौर में कभी सहूलियत मिलती है न ज़माने में इस जज़्बे को कोई अहमियत मिलती है तुम्हारी बातों में आकर न हम उसूल तोड़ेंगे हवा का झौंका है एहसास क्या उस पर यूँ ही दौड़ेंगे  न अपना गौरव छोड़ेंगे न अपना मार्ग मोड़ेंगे न तुम्हारे इश्क की ख़ातिर हम अपना घर ही छोड़ेंगे...  इश्क में उलझकर घर-परिवार और जीवन को तिलांजलि देने वाले युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है मेरी ये कविता... ✍️ WRITTEN BY ANKIT MEROTHA 

POETRY • (LIFE AND STRUGGLE) जीवन और संघर्ष

संघर्ष के मैदान में रोज हु  हालात के हवालात में कैद हूं  जीवन के हर पल बेताब हु  लोगो की हकीकत से अनजान हूं  संघर्ष , सयंम, और बेरोजगारी  कभी कभी हालातो पर भारी काम नोकरी समय सारणी  बात एक ही आमदनी काम की  सारी खुशियां दरकिनार जारी  गमों का हिसाब पूरा बाकी  लोगों के आते जाते समझौते भारी  सच छिपाकर, झूठ दिखाते भारी आजकल अकेलापन सबसे भारी साथ रिश्ते, मतलब की दुनिया सारी चले जीवन सीधा सरल  जैसे चले नौका पवन  विश्वास जतन रख गहरा खुद पर  आस जगाए रख गहरी मन में  जीवन का मंजर गहरा होगा  जब जीवन सफल होगा WRITTEN BY • ANKIT MEROTHA 

POETRY • ( Don't Be afraid ) डर मत

नव तरंग नव तेज बह जा तू  जीवन पवन के वेग से  तू अनन्त है नहीं, काल से तू डर नहीं  चल तू निडर जीवन की डगर  माना तेरे पर सीमित हैं  जीवन में अंधेरा अनगिनत है पर उड़ना चाहे तू  अगर पंख फेलाना चाहे तू  डरता है तुझसे तब काल भी  तू विशाल बन  तू स्वयं महाकाल बन !

A MESSAGE FOR YOUTH ( एक संदेश युवाओं को )

 A MESSAGE FOR YOUTH ( एक संदेश युवाओं को ) आप युवा हो ज़िंदगी शुरू करने जा रहे हो , आप सब उन सभी मुद्दों पर धीरज रखें जो की आपके सवालों के प्रति वैसा ही स्नेह रखे जैसे बंद कमरे में ताला लगा हो या फिर पराई भाषा में किताब लिखी हो  अभी तुरंत इनके जवाब मत देखिए  अभी आपको इसके उत्तर नही मिलेगे क्योंकि वे आपकी समझ से परे हैं  बात अनुभव करने की है  अभी तो आपको सवालों के साथ जीना है  फिर शायद किसी दिन बिना ध्यान दिए अपने आप आपको जवाब मिल जाएंगे ! Written by ANKIT MEROTHA 

POETRY • I WILL FIGHT मैं लडूंगा

में लडूंगा  हर उस परिस्थिति से  जो मुझे हारने पर विवश करेगी में लडूंगा  हर उस अवस्था से  जिस अवस्था में मुझे लाचार और  अयोग्य कहा जाएगा  में लडूंगा  हर उस समय प्रांगण में  जहां पर मुझे हीन समझकर  मेरी आवाज को दबाया जाएगा में लडूंगा हर उस स्थान पर जहा पर  जहां मुझे निर्दोष होते हुए भी दोषी ठहराया जाएगा  में लडूंगा  अपने जीवन के अंतिम क्षण तक क्योंकि लड़ना जरूरी है  स्वयं से भी , परिस्थिति से भी  और जीवन जैसे शत्रु से भी  Written by ANKIT MEROTHA

POETRY • बस दोस्त बन जाता है

  मन से मन का मेल मिले  दोस्त वही बन जाता है उम्र का ना हो कोई बंधन बस साथ उसी का भाता है जीवन की हर मुश्किल में जो भी साथ निभाता है खुशियों में जो शामिल हो गम में भी साथ निभाता है बिन बोले जो सब कुछ समझे आंखों के पानी को समझे जीवन की डगर को आसान बना दे चेहरे पे मुस्कान को ला दे दोस्त वही बन जाता है .... Written by • ANKIT MEROTHA 

POETRY • जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं

जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं गज़ल लिखूं या गम लिखूं तुझे देखू फिर तेरी बात लिखूं इश्क की नई शुरुआत में बता कौनसी बात लिखूं तुझे दिन या खुद को रात लिखूं एक पल भी साथ ना रहे वो एहसास लिखूं तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूं कजरारी सी गहरी आंखों को झरना लिखूं या नम लिखूं तेरे पीछे खुद को आबाद लिखूं या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूं सच लिखूं या भ्रम लिखूं फिर भी खामोश ही है जुबां मेरी अपनी मजबूरी लिखूं या शर्म लिखूं जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं ग़ज़ल लिखूं या गम लिखूं ...! Written by • ANKIT MEROTHA 

POETRY • हार मत मान

कद्र इंसानियत की सजाकर दिलों में हमेशा रखना होसलों को ज़िंदा मगर तृष्णा को ठंडा रखना संघर्ष के इस दौर में तुम मेहनत जारी रखना टूटकर यूं बिखर जाना यह हुनर नही हमारा जिन हालातों में लोग टूट जाते हैं अक्सर उन हालातों से हम रोज जीते हैं ज़िंदगी में हर शख्स बुरा नही होता हर किसी का मन टूटा हुआ नही होता ज़िंदगी के तराशे कुछ यूं कहते हैं हारकर भी हार न मान ऐ मुसाफिर कुछ मौके गुजरे हैं ज़िंदगी का सार अभी बाकी हैं Written by •  ANKIT MEROTHA 

POETRY • एक ख़्वाब

 हथेलियों से फिसलती रही रेत और हम ख्वाब महल के देखते रहे सूरज ढला शाम ढली और छोड़ गए सब अचानक सपनों पर पानी फिर गया जैसे लहरों में बह गया अधूरा वो किला जैसे मायूस होकर निहारते रहे रेत के टीले सोचते रहे काश पल दो पल ही सही पूरा कर लिए होता वह ख्वाब जैसे अब ना जाने कब होगी वो पहर वैसी शाम, वो समय ,वो मौसम , वो शहर हो ना हो इतना वक्त फिर हमारे पास नयी हो तब ख्वाहिशें, ख्वाबों में रहे ना वो बात पर तभी रेत के ख्वाब को समतल कर गई एक लहर मेहरबान तो था चांद ज़मीन पर और छोड़ सब हम तारे रात में चुनते रहे हथेलियों से फिसलती रही रेत और हम ख्वाब महल के बुनते रहे Written by • ANKIT MEROTHA 

POETRY• अंतिम यात्रा

 था में नींद में ओर मुझे इतना सजाया जा रहा था बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था जो कभी देखते भी नहीं थे मोहब्बत की निगाहों से उनके दिल से भी प्यार मूझपे लुटाया जा रहा था कांप उठी मेरी रूह वो मंज़र देख कर जहां मुझे हमेशा के लिए सुलाया जा रहा था मालूम ना था क्यों हैरान था हर कोई मुझे सोते देखकर जोर से रोकर मुझे जगाया जा रहा था ना जाने था कोनसा अजब खेल मेरे घर में बच्चों की तरह मुझे कंधो पर उठाया जा रहा था था पास मेरा हर अपना उस वक्त फिर भी में हर किसी के मन से भूलाया जा रहा था मोहब्बत की इन्तहा थी जिन दिलो में मेरे लिए उन्हीं दिलों के हाथों मुझे जलाया जा रहा था आखिरकार वो सब अंतिम हो रहा था जीवन निकल रहा था और मुझे भुलाया जा रहा था

POETRY • आत्मविश्वास

कद से बड़ा विश्वास है खुद का विश्वास आसरा बेबस जीवन का यूं तो अख़बार हूं में खुद के जीवन का रोज़ सवेरा रोज बसेरा है जीवन का जीवन में बिखरा है हौसला दिल से यूं निकला है हौसला ना मान मिला ना सम्मान मिला वक्त से पहले हर शक्स गिला लोगों के मुंह पर सुने थे चर्चे अपनी असफलता के गहरे मुद्दे हार गया हूं हर मोड़ से गहरा हार रहा हूं जीवन में गहरा विश्वास जतन है गहरा मुझ में आस जगी है गहरी मन में लोग कहे कुछ भी यूं मुझसे ना में मानु हार दिल से जारी है संघर्ष यूं मेरा वक्त लाऊंगा ग़ज़ब का गहरा मेहनत की यह लगन लगी है मन में एक नई अलख जगी है आज नहीं पर कल तो होगा जीवन का वो मंज़र गहरा होगा संघर्ष भरे इस जीवन में ना लोग हमारे अपने है हम तो खुद के जीवन में खुद के दम पर जीते हैं लगन लगी है मेहनत की यूं सफलता गहरी पाने की हर कोई यूं मुझपे हसंता है जैसे कि खुद सक्षम होता है हर कोई कहता है मुझसे ना कर कोई वादा खुद से व्यर्थ रहेगा संघर्ष तो तेरा बेकार रहेगा परिणाम तो तेरा ज़िद है खुद की खुद से मेरी ना कभी हालातों की देरी जारी है संघर्ष यूं मेरा वक्त लाऊंगा ग़ज़ब का गहरा Written by • ANKIT MEROTHA