POETRY • ( LOVE /HOME/LIFE) प्यार घर और जीवन
न तो जज़्बात के पैरों से कभी ज़िंदगी चलती है न ही विकल्परहित जीवन में कोई खुशी मिलती है न तो इश्क के दौर में कभी सहूलियत मिलती है न ज़माने में इस जज़्बे को कोई अहमियत मिलती है तुम्हारी बातों में आकर न हम उसूल तोड़ेंगे हवा का झौंका है एहसास क्या उस पर यूँ ही दौड़ेंगे न अपना गौरव छोड़ेंगे न अपना मार्ग मोड़ेंगे न तुम्हारे इश्क की ख़ातिर हम अपना घर ही छोड़ेंगे... इश्क में उलझकर घर-परिवार और जीवन को तिलांजलि देने वाले युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है मेरी ये कविता... ✍️ WRITTEN BY ANKIT MEROTHA