POETRY • हार मत मान
कद्र इंसानियत की सजाकर
दिलों में हमेशा रखना
होसलों को ज़िंदा मगर तृष्णा
को ठंडा रखना
संघर्ष के इस दौर में
तुम मेहनत जारी रखना
टूटकर यूं बिखर जाना
यह हुनर नही हमारा
जिन हालातों में लोग टूट जाते हैं
अक्सर उन हालातों से हम रोज जीते हैं
ज़िंदगी में हर शख्स बुरा नही होता
हर किसी का मन टूटा हुआ नही होता
ज़िंदगी के तराशे कुछ यूं कहते हैं
हारकर भी हार न मान ऐ मुसाफिर
कुछ मौके गुजरे हैं
ज़िंदगी का सार अभी बाकी हैं
Written by • ANKIT MEROTHA
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