POETRY• अंतिम यात्रा

 था में नींद में ओर मुझे इतना सजाया जा रहा था

बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था


जो कभी देखते भी नहीं थे मोहब्बत की निगाहों से

उनके दिल से भी प्यार मूझपे लुटाया जा रहा था


कांप उठी मेरी रूह वो मंज़र देख कर

जहां मुझे हमेशा के लिए सुलाया जा रहा था


मालूम ना था क्यों हैरान था हर कोई

मुझे सोते देखकर जोर से रोकर मुझे जगाया जा रहा था


ना जाने था कोनसा अजब खेल मेरे घर में

बच्चों की तरह मुझे कंधो पर उठाया जा रहा था


था पास मेरा हर अपना उस वक्त

फिर भी में हर किसी के मन से भूलाया जा रहा था


मोहब्बत की इन्तहा थी जिन दिलो में मेरे लिए

उन्हीं दिलों के हाथों मुझे जलाया जा रहा था


आखिरकार वो सब अंतिम हो रहा था

जीवन निकल रहा था

और मुझे भुलाया जा रहा था

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