POETRY • (LIFE AND STRUGGLE) जीवन और संघर्ष
संघर्ष के मैदान में रोज हु
हालात के हवालात में कैद हूं
जीवन के हर पल बेताब हु
लोगो की हकीकत से अनजान हूं
संघर्ष , सयंम, और बेरोजगारी
कभी कभी हालातो पर भारी
काम नोकरी समय सारणी
बात एक ही आमदनी काम की
सारी खुशियां दरकिनार जारी
गमों का हिसाब पूरा बाकी
लोगों के आते जाते समझौते भारी
सच छिपाकर, झूठ दिखाते भारी
आजकल अकेलापन सबसे भारी
साथ रिश्ते, मतलब की दुनिया सारी
चले जीवन सीधा सरल
जैसे चले नौका पवन
विश्वास जतन रख गहरा खुद पर
आस जगाए रख गहरी मन में
जीवन का मंजर गहरा होगा
जब जीवन सफल होगा
WRITTEN BY • ANKIT MEROTHA
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