POETRY • ( Don't Be afraid ) डर मत

नव तरंग नव तेज बह जा तू 

जीवन पवन के वेग से 


तू अनन्त है नहीं, काल से तू डर नहीं 

चल तू निडर जीवन की डगर 


माना तेरे पर सीमित हैं 

जीवन में अंधेरा अनगिनत है


पर उड़ना चाहे तू 

अगर पंख फेलाना चाहे तू 


डरता है तुझसे तब काल भी 

तू विशाल बन 

तू स्वयं महाकाल बन !

Comments

Popular posts from this blog

SPEECHES ORATORY (स्वतंत्र भारत, राष्ट्र निर्माण, देश प्रेम )

POETRY • MY MOTHER ( मेरी मां )

POETRY • ( LOVE /HOME/LIFE) प्यार घर और जीवन