POETRY • जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं
जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं
गज़ल लिखूं या गम लिखूं
तुझे देखू फिर तेरी बात लिखूं
इश्क की नई शुरुआत में
बता कौनसी बात लिखूं
तुझे दिन या खुद को रात लिखूं
एक पल भी साथ ना रहे
वो एहसास लिखूं
तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूं
कजरारी सी गहरी आंखों को
झरना लिखूं या नम लिखूं
तेरे पीछे खुद को आबाद लिखूं
या तन्हाई में खुद को बर्बाद लिखूं
सच लिखूं या भ्रम लिखूं
फिर भी खामोश ही है जुबां मेरी
अपनी मजबूरी लिखूं या शर्म लिखूं
जज़्बात लिखूं या हालात लिखूं
ग़ज़ल लिखूं या गम लिखूं ...!
Written by • ANKIT MEROTHA
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