POETRY • MY MOTHER ( मेरी मां )
तकलीफों को मेरी बिना कहे समझ जाती है चेहरा उदास देख खुद परेशान हो जाती है आंख में आंसू देख ले तो चैन कहा वो पाती है मेरी खुशियों के लिए सारे जग से लड़ जाती है सब मतलब के रिश्ते है , स्वार्थ बिना कोई काम न आता एक मां का रिश्ता , जीवनभर साथ निभाता उस माता के कर्ज को हम आजीवन चुका न पाएंगे हजार जन्म लेकर भी उसका मोल न पाएंगे इस भारत माता की रक्षा में हम अपनी जान लुटा देंगे निज माता के मान में हम अपना शीश कटा देंगे हर बार यही तमन्ना है इस धरती मां पर आ जाएं अगर पुनः जन्म हुआ तो , वही मां, वही गोद मिल जाए WRITTEN BY • ANKIT MEROTHA