Posts

POETRY • MY MOTHER ( मेरी मां )

तकलीफों को मेरी बिना कहे समझ जाती है  चेहरा उदास देख खुद परेशान हो जाती है आंख में आंसू देख ले तो चैन कहा वो पाती है मेरी खुशियों के लिए सारे जग से लड़ जाती है सब मतलब के रिश्ते है , स्वार्थ बिना कोई काम न आता  एक मां का रिश्ता , जीवनभर साथ निभाता  उस माता के कर्ज को हम आजीवन चुका न पाएंगे  हजार जन्म लेकर भी उसका मोल न पाएंगे इस भारत माता की रक्षा में हम अपनी जान लुटा देंगे  निज माता के मान में हम अपना शीश कटा देंगे हर बार यही तमन्ना है इस धरती मां पर आ जाएं  अगर पुनः जन्म हुआ तो ,  वही मां, वही गोद मिल जाए  WRITTEN BY • ANKIT MEROTHA

POETRY • CAN'T STOP (रुक नहीं सकता)

यदि आज रुका विश्राम किया  क्षण भर का भी आराम किया  बिना लक्ष्य भेदे लोटा तो  फिर हमने कैसा संग्राम किया  क्या इसी दिन की तृष्णा में  नींदों का बलिदान दिया  बिना विजय की प्राप्ति के  केसे पूर्ण विराम किया  यदि मृत्यु मुझे स्वीकार थी तो  फिर भय का केसे सम्मान किया  नेत्रों में तनिक अभिमान नही  ये तो साहस का अपमान किया  अपनी चिंता में धधक रहा  अपने मन को ही शमसान किया  जब सब कुछ अपना हार गया  तो फिर हमने कैसा दान किया  यदि क्षण भर भी विश्राम किया तो  फिर केसा संग्राम किया ....! Written By • ANKIT MEROTHA 

ARTICLE (आलेख) बेरोजगारी और अकेलापन •

 ARTICLE  (आलेख ) • बेरोजगारी और अकेलापन •  बेरोजगारी और अकेलापन एक दूसरे के पूरक हैं  अकेलेपन के रहते हम खुद से ही चिडने लगते हैं खुद का सामना करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते  बेरोजगारी में अकेले रहने की आदत धीरे धीरे मजबूरी बन जाती है  क्योंकि हम हर किसी का सामना करने से डरने लगते , लोगो को बस बदले हुए नजर आते हैं  वो ये नही जानते , और ना ही समझना चाहते की हम पर क्या गुजर रही है जो हम  इतना बदले हैं  आजकल डरने लगा हूं आईने से में या डर है मुझे अपने आप से ही नहीं देखा है अक्स अपना कुछ दिनों से मेने जब से तन्हाई रास आने लगी है मुझे बढ़ती बेरोजगारी के तार्किक विश्लेषण से पता चलता हैं की हमारा समाज बेरोजगारी व बेरोजगार वर्ग को घृणित भाव से देखता हैं  उन्हें ऐसा लगता है इनका जीवन सादर्श्य समुचित नहीं है ,  तर्क विचार की शैली सफलता की श्रेणी इनके लिए बनी नही है जबकि ऐसा नही है बेरोजगारी का मुख्य कारण • बेरोजगारी बहु आयामी चुनौती हैं जो दुनियाभर के व्यक्तियो और समाजो को प्रभावित करती है  बेरोजगारी मुख्यत, मांग पक्ष या नियोक्ता तथा ...

SPEECHES ORATORY (स्वतंत्र भारत, राष्ट्र निर्माण, देश प्रेम )

  ( स्वतंत्र भारत, राष्ट्र निर्माण , देश प्रेम ) संपूर्ण  भारत 15 अगस्त को प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस पावन पर्व के रुप में मनाता हैं  आजादी का असली मतलब वही समझ सकता है जिसने कभी गुलामी की हो, हम सौभाग्यशाली हैं की हमने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया  यूं तो आज़ादी की लो सन् 1857 में ही शुरू हो गई थी जो 1947 में बेमिसाल होकर देश को स्वतंत्र बनाया  प्राचीन मध्यकालीन व वर्तमान स्वतंत्र भारत के अदम्य साहस के प्रतीक व उदाहरण से स्पष्ट करना चाहता हूं की  भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने करने वाले महानतम सेनानियों के रुप में , रानी लक्ष्मी बाई, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद व सुभाष चंद्र बोस एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल  ऐसे कई महानतम सेनानियों ने अपना सर्वस्व बलिदान दिया और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बना   भारत को आजाद करना ही सर्वस्व नही है , बल्कि उसे आजाद बनाए रखना सब कुछ है स्वतंत्र भारत के बाद भी कई ऐसे हादसे व घटनाएं हमारे देश में घटित हुई हैं  सन् 1962 , 65 , 71 के यु...

POETRY • YOU WILL LOSS ME ( तुम मुझे खो दोगे ))

एक दिन हम जुदा हो जाएंगे  ना जाने कहा खो जायेंगे  तुम लाख पुकारोगे हमको  पर लोटकर हम नही आएंगे  थक हार के दिन के कामों से  रात को बैचेन हो जाओगे अपने फोन में पैगाम मेरा नही पाओगे  तब याद तुम्हे हम आएंगे पर लौटकर नहीं आएंगे  इक रोज़ ये रिश्ता टूटेगा  फिर कोई न हमसे रूठेगा  पर हम ना आंखे खोलेंगे  तुमसे कभी ना बोलेंगे  आखिर उस दिन तुम रो दोगे ऐ दोस्त तुम मुझे खो दोगे WRITTEN BY - ANKIT MEROTHA 

POETRY • MEET YOURSELF (खुद से भी मिला किजिए )

ना चादर बड़ी कीजिए  ना ख्वाहिश दफन कीजिए  चार दिन की है ज़िंदगी चैन से बसर कीजिए  न परेशान किसी को किजिए  न हैरान किसी को कीजिए  कोई लाख गलत भी बोले  मुस्कुरा कर छोड़ दीजिए  न रूठा किसी से किजिए  न झूठा वादा किसी से किजिए  कुछ फुरसत के पल निकालिए  कभी खुद से भी मिला कीजिए WRITTEN BY • ANKIT MEROTHA 

POETRY • ( LOVE /HOME/LIFE) प्यार घर और जीवन

न तो जज़्बात के पैरों से कभी ज़िंदगी चलती है न ही विकल्परहित जीवन में कोई खुशी मिलती है न तो इश्क के दौर में कभी सहूलियत मिलती है न ज़माने में इस जज़्बे को कोई अहमियत मिलती है तुम्हारी बातों में आकर न हम उसूल तोड़ेंगे हवा का झौंका है एहसास क्या उस पर यूँ ही दौड़ेंगे  न अपना गौरव छोड़ेंगे न अपना मार्ग मोड़ेंगे न तुम्हारे इश्क की ख़ातिर हम अपना घर ही छोड़ेंगे...  इश्क में उलझकर घर-परिवार और जीवन को तिलांजलि देने वाले युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है मेरी ये कविता... ✍️ WRITTEN BY ANKIT MEROTHA