SPEECHES ORATORY (स्वतंत्र भारत, राष्ट्र निर्माण, देश प्रेम )

 ( स्वतंत्र भारत, राष्ट्र निर्माण , देश प्रेम )


संपूर्ण  भारत 15 अगस्त को प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस पावन पर्व के रुप में मनाता हैं 

आजादी का असली मतलब वही समझ सकता है जिसने कभी गुलामी की हो, हम सौभाग्यशाली हैं की हमने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया 

यूं तो आज़ादी की लो सन् 1857 में ही शुरू हो गई थी जो 1947 में बेमिसाल होकर देश को स्वतंत्र बनाया 

प्राचीन मध्यकालीन व वर्तमान स्वतंत्र भारत के अदम्य साहस के प्रतीक व उदाहरण से स्पष्ट करना चाहता हूं की 

भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने करने वाले महानतम सेनानियों के रुप में , रानी लक्ष्मी बाई, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद व सुभाष चंद्र बोस एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल 

ऐसे कई महानतम सेनानियों ने अपना सर्वस्व बलिदान दिया और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बना  

भारत को आजाद करना ही सर्वस्व नही है , बल्कि उसे आजाद बनाए रखना सब कुछ है स्वतंत्र भारत के बाद भी कई ऐसे हादसे व घटनाएं हमारे देश में घटित हुई हैं 

सन् 1962 , 65 , 71 के युद्धों में अपना सुहाग गवां देने वाली औरते 

जब घर के हालात यह होते थे - 

प्यार भी भरपूर गया  

मांग का सिंदूर भी गया

नन्हे नन्हे बच्चों का बचपन चला गया

छोटी छोटी बेटियों की चोटियां चली गई 

बाप की कमाई गई , भाई की पढ़ाई गई

ऐसा एक विस्फोट हुआ जिसमे 

कई जिस्मों की बोटियां चली गई 


जब सरहदों पर युद्धों के हालात हो जाए , या स्वतंत्र भारत में अराजकता आ जाए 

तब एक मां अपने बेटे को दुश्मनों की धज्जियां उड़ाने के लिए 

सरहदों पर भेज देती हैं 

और पत्र लिखकर भेजा करती हैं - 


" की अम्मा ने खत लिखा है बड़े ही चाव से 

पुत्र मेरे ना घबरा जाना एक इंच भी पीछे ना हट जाना 

चाहे इंच इंच कट जाना " 


इस तरह पूरा परिवार आजादी साबित करा रहा होता था, तब देश बलिदान मांगता था 

यदि कोई व्यक्ति अपना पूरा काम मेहनत, ईमानदारी व लगन से करे तो वह उसकी देशभक्ति है और वही सबसे बड़ा देशभक्त हैं 

में नही मानता की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की डीपी को तीन रंगों में रंगना ही देशभक्ति है 

यदि आप कहेंगे की वर्ष में दो बार तिरंगा फहराना या हाथ में लेना देशभक्ति है, 

तो फुटपाट पर कोई लड़का ट्रैफिक की छांव में नंगे पैर तिरंगा बेच रहा होता है तो क्या वह उसकी देशभक्ति है 

वह उसकी देशभक्ति नही बल्कि उसके पेट के भूख की शक्ति है जो उसे मजबूर करती है 

असल में अपने देश के प्रति समर्पण का भाव है देशभक्ति, लोगो की मदद करना आपसी प्रेम रखना है देशभक्ति 


स्वतंत्र भारत में लोगो के लिए कुछ पंक्तियां - 

अगर तू परिंदा है तो यह आसमान तेरा है 

अगर तू दरिंदा है तो यह समशान तेरा है 

यह कब्र भी तेरी है यह कब्रिस्तान भी तेरा है 


हमारा राष्ट्र निर्माण तब तक संभव नहीं होगा जब एक नागरिक 

नैतिक रूप से सटीक

चारित्रिक रूप से भ्रष्ट 

अधार्मिक रूप से अंधा 

अनैतिक रूप से गंदा 


और स्वैच्छिक मानवीय मूल्यों में जिन्न सिन्न पेयबंदमय अखंड भारत को खण्ड खण्ड करता रहेगा तब तक हमारा राष्ट निर्माण संभव नही होगा 

अंत में कुछ पंक्तियों के माध्यम से अपने शब्दों को विराम देना चाहता हूं 


हो गई है पीर पर्वत सी अब पिघलनी चाहिए 

इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए 

जाती धर्म सम्प्रदाय से परे हटकर हर समुदाय को मानना चाहिए 

कुछ भी हो हिंदुस्तान का वर्चस्व सर्वस्व होना चाहिए 


I BEING AN INDIAN 

I BEING AN STUDENT

AND FEEL PROUD FOR INDIAN 

           

                          JAI HIND 🇮🇳


WRITTEN BY ANKIT MEROTHA 

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