ARTICLE (आलेख) बेरोजगारी और अकेलापन •

 ARTICLE  (आलेख ) •

बेरोजगारी और अकेलापन • 


बेरोजगारी और अकेलापन एक दूसरे के पूरक हैं 

अकेलेपन के रहते हम खुद से ही चिडने लगते हैं खुद का सामना करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते 

बेरोजगारी में अकेले रहने की आदत धीरे धीरे मजबूरी बन जाती है 

क्योंकि हम हर किसी का सामना करने से डरने लगते , लोगो को बस बदले हुए नजर आते हैं 

वो ये नही जानते , और ना ही समझना चाहते की हम पर क्या गुजर रही है जो हम  इतना बदले हैं 

आजकल डरने लगा हूं आईने से में या डर है मुझे अपने आप से ही नहीं देखा है अक्स अपना कुछ दिनों से मेने जब से तन्हाई रास आने लगी है मुझे

बढ़ती बेरोजगारी के तार्किक विश्लेषण से पता चलता हैं की हमारा समाज बेरोजगारी व बेरोजगार वर्ग को घृणित भाव से देखता हैं 

उन्हें ऐसा लगता है इनका जीवन सादर्श्य समुचित नहीं है , 

तर्क विचार की शैली सफलता की श्रेणी इनके लिए बनी नही है जबकि ऐसा नही है


बेरोजगारी का मुख्य कारण •

बेरोजगारी बहु आयामी चुनौती हैं जो दुनियाभर के व्यक्तियो और समाजो को प्रभावित करती है 

बेरोजगारी मुख्यत, मांग पक्ष या नियोक्ता तथा आपूर्ति पक्ष या श्रमिक दोनों की ओर से आते है 

मांग पक्ष में कमी उच्च ब्याज दरें वैश्विक मंदी और वित्तीय संकट के कारण हो सकती है 

आपूर्ति पक्ष से , घर्षण बेरोजगारी और सरंचनात्मक रोजगार एक बड़ी भूमिका निभाते हैं 

बेरोजगारी • 

कई कारकों जैसे अधिक जनसंख्या, निम्न कौशल स्तर, नियोजन की विफलता, दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली, धीमी आर्थिक वृद्धि, विकास और पूंजी में कमी के कारण होती हैं 

कल के अंश के आगे बढ़ती हुई बेरोजगारी का एक मुख्य कारण हमारा समाज है 

जो अपनी व्यवस्था और अपने खोखले आदर्शों से हट जीने वाले लोगों को बहुत ही हीन दृष्टि से देखता है 

समाज में सिर्फ एक ही समस्या नहीं है कई और भी समस्याएं है जिनका जन्म हमारे इसी आदर्श समाज की देन है l 

एक विचार यह भी •

 आज कल दहेज प्रथा का जो इतना प्रचलन है वह भी इसी व्यवस्था के कारण हैं 

लोगो ने सरकारी नौकरी को इतनी तूल दे रखी है कि वो अपना दर्जा अन्य लोगो से ऊंचा समझते हैं 

इसी कारण मोटे दहेज की मांग करते हैं, दहेज प्रथा को बढ़ावा भी वही लोग देते हैं जो बाहरी तौर पर उसका विरोध करने का दिखावा करते हैं 

कई बार ऐसा होता है की लोगो को मन मांगा मोटा दहेज नही मिलता तो बाद में अपने घर की महिलाओं को दहेज के मुद्दे को लेकर उनको प्रताड़ित करते हैं, उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं ऐसे मुद्दों में महिलाओं के हत्याओं के मामले भी सामने आते हैं 

कई दफा ऐसा भी देखा है और सुना है की लोग बाहरी तौर पर अपनी शान बचाने के लिए इस तरह का ढोंग करते है की वो दहेज के खिलाफ है लेकिन वही लोग अंदरूनी रूप से दहेज का लेन देन करते नजर आते हैं 

गावो में तो इसे लेकर प्रतिस्पर्दा रहती है की हर ओहदे के हिसाब से दहेज की रकम निश्चित की हुई है किसी को कम ज्यादा मिलता है तो उसको लेकर बाते होती है

फला शादी में इतना दहेज आया है 

इकोनॉमी का एक नियम है की किसी चीज की जितनी डिमांड होगी उसी चीज की कीमत में उतनी ही बढ़ोतरी होगी

 वही बात यहां लागू होती होती हैं हर गरीब से गरीब आदमी भी अपनी लड़की की शादी के लिए सरकारी कर्मचारी ही ढूंढता हैं भले खुद को गिरवी ही क्यों न रखना पड़े 

मेने अपने आस पास ऐसे कई मामले देखे है , जहां पर इस तरह के मामले सामने आते है खैर उसमे उनका स्वार्थ नही है समाज की व्यवस्था ही ऐसी है और सब चाहते है की उनकी बहन बेटी, जीवन में खुश रहे !


बेरोजगारी का दुष्प्रभाव •- 

बेरोजगारी का समग्र विकास पर असर पड़ता है , इससे युवा हताश और निराशावादी हो जाते हैं 

बेरोजगारी बढ़ती है जिससे अर्थव्यवस्था नीचे की ओर गिरती है बेरोजगारी के परिणामस्वरूप मानव संसाधनों की बरबादी होती है


बेरोजगारी को दूर केसे करे • - 


1. औद्योगिकरण - नए उद्योगों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं 

2. कौशल विकास - लोगों को सही कौशल उपलब्ध करवाकर उन्हे उचित रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए 

3. अच्छी नीतियां - सरकार की नीतियां बेरोजगारी को कम करने में मदद करेगी

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