POETRY • MEET YOURSELF (खुद से भी मिला किजिए )


ना चादर बड़ी कीजिए 

ना ख्वाहिश दफन कीजिए 


चार दिन की है ज़िंदगी

चैन से बसर कीजिए 


न परेशान किसी को किजिए 

न हैरान किसी को कीजिए 


कोई लाख गलत भी बोले 

मुस्कुरा कर छोड़ दीजिए 


न रूठा किसी से किजिए 

न झूठा वादा किसी से किजिए 


कुछ फुरसत के पल निकालिए 

कभी खुद से भी मिला कीजिए


WRITTEN BY • ANKIT MEROTHA 

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