POETRY • CAN'T STOP (रुक नहीं सकता)



यदि आज रुका विश्राम किया 
क्षण भर का भी आराम किया 
बिना लक्ष्य भेदे लोटा तो 
फिर हमने कैसा संग्राम किया 

क्या इसी दिन की तृष्णा में 
नींदों का बलिदान दिया 
बिना विजय की प्राप्ति के 
केसे पूर्ण विराम किया 

यदि मृत्यु मुझे स्वीकार थी तो 
फिर भय का केसे सम्मान किया 
नेत्रों में तनिक अभिमान नही 
ये तो साहस का अपमान किया 

अपनी चिंता में धधक रहा 
अपने मन को ही शमसान किया 
जब सब कुछ अपना हार गया 
तो फिर हमने कैसा दान किया 

यदि क्षण भर भी विश्राम किया तो 
फिर केसा संग्राम किया ....!

Written By • ANKIT MEROTHA 

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